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गोविंद देव के द्वार पर श्याम से संवाद

आज   मंदिर   सूं   निकळ्यो   तो , दिल   में   बस   एक   ही   अरदास — “ हे   गोविंद   देव ! मने   भी   बना   दे प्रेम   में   राधा , बुद्धि  ...